मेरी बगिया
अजय और अनिता समझदार भाई-बहन थे। उनके पड़ोसी के आँगन में सुंदर बगिया थी। लेकिन उनके अपने घर में जगह नहीं थी। उनकी माँ को पूजा के लिए फूलों की जरूरत होती थी। तब वे दोनों पड़ोस के घर फूल लेने जाते थे। एक दिन वे फूल लेने गए। पड़ोस की आंटी ने कहा कि रोज फूल नहीं आ सकते। जो दो-चार फूल बचे हैं, वे ले जाएँ। यह सुनकर वे उदास हो गए।
एक दिन उन्होंने दूरदर्शन पर देखा कि गमले में भी पौधे उगाए जा सकते हैं। वे बहुत खुश हुए। माता-पिता से कहकर गमले ले आए। दोनों ने उनमें मिट्टी डाली। मिट्टी में खाद और पानी मिलाया। फिर फूलों के पौधे लगा दिए। वे रोज पौधों की देखभाल करते थे। धीरे-धीरे उनमें फूल खिलने लगे। यह देखकर वे बहुत खुश हुए।
जंगल में मंगल
एक समय की बात है। नंदनवन के सभी प्राणी उदास थे। शेर राजा ने इसका कारण जानना चाहा। शेर ने हाथी से पूछा। हाथी ने बताया कि मानव नंदनवन के पेड़ काट रहे हैं। इससे जानवरों को रहने और खाने की जगह कम मिल रही है। शेर ने सोचा कि धीरे-धीरे मानव सब कुछ छीन रहे हैं। भालू ने कहा कि कई प्रजातियाँ समाप्त हो गई हैं।
सभी प्राणी अपनी परेशानियाँ बताने लगे। वे मानव को दोष देने लगे। शेर ने सभी को शांत किया। उसने कहा कि इस तरह परेशानी हल नहीं होगी। सभी को धैर्य रखना चाहिए। इस विषय पर तुरंत कोई उपाय सोचना होगा। हाथी ने कहा कि कुछ प्राणियों ने भी मानव बस्तियों में जाकर उन्हें परेशान किया है। नटखट बंदर ने सुझाव दिया कि प्राणी मित्र संस्था को निवेदन भेजा जाए।
जल्दबाजी
संजना नाम की एक लड़की थी। वह दूसरी कक्षा में पढ़ती थी। बहुत चुलबुली और चंचल स्वभाव की थी। वह बहुत होशियार भी थी। वह पास-पड़ोस में सभी की मदद करती थी। उसे हर काम जल्दबाजी में करने की आदत थी। इसी गड़बड़ी में उसके सारे काम बिगड़ जाते थे। घर में भी हड़बड़ी में उसके हाथों से बर्तन गिरते थे। उसका किसी से टकराना तो आम बात थी।
एक दिन जल्दबाजी में वह दादी माँ से टकरा गई। वह खुद गिर गई। पानी का गिलास भी गिर गया। दादी माँ ने उसे समझाया कि हड़बड़ी न करे। एक दिन की बात है, संजना पाठशाला के सामने रिक्शे से उतर रही थी। जल्दबाजी में उसका बस्ता रिक्शे में फँसकर फट गया। बस्ते से सारा सामान जमीन पर गिर गया। यह देखकर वह रोने लगी।
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