जादू
देवपुर का राजा कर्मसेन न्यायप्रिय था परंतु उसे गीत-संगीत में कोई रुचि नहीं थी। अतः राज्य में गाने-बजाने की मनाही थी। उसी राज्य में सत्यजीत नाम का पढ़ा-लिखा, बाँसुरी बजाने में कुशल एक युवक था। एक दिन जंगल में पेड़ के नीचे बैठकर वह बाँसुरी बजाने वाला ही था कि उसे एक घुड़सवार आता दिखाई दिया। अचानक घोड़े का पाँव फिसला और उस पर बैठा व्यक्ति जमीन पर गिर पड़ा और बेहोश हो गया।
वे राजा कर्मसेन थे। सत्यजीत ने राजा को होश में लाने का प्रयत्न किया किंतु उन्हें होश नहीं आया। सत्यजीत सोच में डूब गया फिर वह अपनी बाँसुरी निकालकर बजाने लगा। बाँसुरी का मधुर संगीत पूरे वातावरण में गूंजने लगा। पक्षी भी उस मधुर संगीत से आस-पास मँडराने लगे। तभी उसने देखा, राजा धीरे-धीरे आँखें खोल रहे हैं। सत्यजीत डरकर राजा के पाँव में गिर पड़ा।
बच्चे को दूध मिला
एक बच्चा बिना दूध पिए सो गया। उसकी माँ ने उसके लिए दूध ढंककर रख दिया था। उसी झोंपड़ी में एक चूहा रहता था, जो अपने बिल से बाहर आया। उसकी हलचल से दूध का बरतन उलट गया। बच्चा जागा और भूख से रोने लगा, लेकिन घर में दूध नहीं था। चूहा बच्चे की माँ के पास गया और मन में निश्चय किया कि वह दूध लाएगा।
वह तेज़ी से दौड़कर गाय के पास पहुँचा और उससे दूध माँगा। गाय ने बताया कि उसे घास नहीं मिल रही है, इसलिए वह सूख गई है। उसने शर्त रखी कि अगर उसे घास मिलेगी, तभी वह दूध दे पाएगी। चूहा दौड़कर घास के मैदान के पास पहुँचा और वहाँ घास माँगी। उसने समझाया कि घास से गाय को भोजन मिलेगा, जिससे वह बच्चे को दूध दे पाएगी। मैदान ने जवाब दिया कि बिना पानी के वह घास नहीं उगा सकता।
आखिरी दिन
बहन जी कक्षा में आई। उन्होंने देखा कि बच्चों की मनःस्थिति पढ़ाई के लिए नहीं थी। उन्होंने घोषणा की कि आज पढ़ाई नहीं होगी। यह सुनकर बच्चे बहुत खुश हुए। बहन जी ने कहा कि सभी एक पंक्ति में खड़े हो जाएँ। फिर सभी मैदान में पेड़ के नीचे चले गए। वहाँ बहन जी ने सबको अर्धगोलाकार में बैठने के लिए कहा। बच्चे जल्दी से बैठ गए। बहन जी ने पहले से ही परचियाँ तैयार कर रखी थीं।
इन परचियों में किसान, रसोइया, दूधवाला, सब्जीवाला और डॉक्टर जैसे नाम लिखे थे। उन्होंने बताया कि सभी को एक-एक परची लेनी होगी और परची लेने के बाद सोचने के लिए पाँच मिनट मिलेंगे। सूचना जारी रखते हुए, उन्होंने समझाया कि किसी एक विद्यार्थी का क्रमांक बोला जाएगा, जिसे परची के अनुसार अभिनय करना होगा। शेष विद्यार्थी अभिनय देखकर उस व्यवसाय का नाम बताएँगे। इसके बाद, बच्चों ने अभिनय करना शुरू किया।
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