संगठन
एक बार चिड़िया के घोंसले को यह अहसास हो गया कि वह चिड़िया और उसके अंडों को शरण देता है। उसे लगा कि वह गरमी, सर्दी और बरसात में उनकी रक्षा करता है और इसी कारण चिड़िया और उसके बच्चे तीनों मौसम में आराम से रहते हैं। शाम को जब चिड़िया लौटी, तो घोंसले ने गर्व से कहा कि चिड़िया और उसके बच्चे उसी की वजह से सुरक्षित हैं। उसने सोचा कि वह अपने तिनके इधर-उधर बिखेर देगा।
चिड़िया और उसके बच्चे बेघर हो जाएंगे और उन्हें सिर छिपाने की जगह भी नहीं मिलेगी। चिड़िया मुस्कुराई और घोंसले को समझाने लगी। उसने यह स्पष्ट किया कि घोंसले की बात सही है, लेकिन एक महत्वपूर्ण बात वह भूल रहा है कि यदि वह अपने तिनके बिखेर देगा, तो स्वयं भी नष्ट हो जाएगा। आगे यह भी चिडिया ने बताया कि जिन तिनकों से वह बना है, वे पहले से ही इधर-उधर बिखरे पड़े थे।
मैं दीपक हूँ
सर्वप्रथम आदिमानव ने पत्थर पर पत्थर पटककर, रगड़कर अथवा घिसकर आग पैदा की। धीरे-धीरे मानव का विकास होता गया और साथ में मेरा भी जन्म हुआ। जब से मानव मिट्टी के बर्तन बनाने लगा तब से उसने मिट्टी से मुझे विभिन्न आकारों में बनाकर, नक्काशी करके, मेरा सौंदर्य और भी बढ़ाया। अब मेरे दो साथी, तेल और बाती मेरे साथ थे। मैं झोपड़ी और घर को प्रकाशित करने लगा। बाद में उसने मुझे धातु से भी बनाना शुरू किया।
मुझे अलग-अलग सुंदर आकार और नाम मिलते गए, जैसे टिबरी, दीपक, चिराग, दीया, लालटेन आदि। मेरे टिमटिमाते प्रकाश में कितने ही महापुरुषों ने अध्ययन किया और ज्ञान से इस संसार को आलोकित किया। मुझपर गीत लिखे गए। कहा जाता है कि संगीतकारों ने मेरे लिए दीपक राग भी रचा, जिसे सुनकर मैं अपने-आप जल उठता था। संसार के महान वैज्ञानिक 'एडिसन' ने मुझे एक नए रूप में विकसित किया। उन्होंने बिजली से जलने वाले विद्युतदीप का आविष्कार किया।
घंटाकरण
नगर में यह अफवाह फैल गई कि जंगल में भूत रहता है। उसका नाम घंटाकरण है। वह घंटा बजाता है। अफवाह से लोग बहुत भयभीत हुए। जंगल की ओर भूलकर भी कोई न जाता। जंगल से लकड़हारे लकड़ियाँ न बीनते, घसियारे घास न काटते, चरवाहे जंगल में पशुओं को न ले जाते थे। सारा का सारा जंगल घंटाकरण भूत की राजधानी बन गया। अब तो उस नगर के राजा को भी बड़ी चिंता हुई।
उसने सयानों और जादूगरों को इकट्ठा कर इस भूत को जंगल से निकालने का आदेश दिया, अन्यथा सारा जंगल वीरान हो जाएगा और जंगल से मंगल गायब हो जाएगा। लोगों ने अपने-अपने तरीके आरंभ किए, परंतु घंटाकरण किसी के काबू में न आया। तभी एक बुद्धिमान मनुष्य उधर कहीं से आ निकला। वह भूतों में विश्वास नहीं करता था। उसने अनुमान लगाना शुरू किया कि सच्चाई क्या हो सकती है। वह साधु का वेश बनाकर जंगल में घुसा।
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